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आज के लेख में Delhi Saltanat के इतिहास में Tuglak Vansh Ka Sansthapak और tuglak vansh तथा Tuglak Vansh को याद करने की trick एवं तुगलक वंश का पतन इसके अलावा तुगलक वंश से पूछे जाने वाले प्रश्नों को करेंगे जो विगत वर्ष की परीक्षाओं में आए हुए हैं |

तुगलक वंश (Tuglak Dynasty) : 1320-1414

अगर आपने तुगलक वंश से पहले का इतिहास नहीं पढ़ा है तो उसके लिए आप नीचे पोस्ट का लिंक मिल जाएगा वहां से आप जरूर पढ़ लेंगे हम एक क्रम हमें आपके साथ इस पोस्ट को शेयर करते हैं और उसमें ऑडियो फाइल भी आपको देते हैं जिससे तुगलक वंश का इतिहास, दिल्ली सल्तनत के बारे में गहन अध्ययन कर सकें और कभी भी अगर आपसे प्रश्न पूछा जाए तो आप उसके उत्तर को दे पाए इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपके अंदर आत्मविश्वास आ जाएगा कि आप इन प्रश्नों को कर सकते हैं दिल्ली सल्तनत के इतिहास में तुगलक वंश को अच्छे तरीके से तैयार कर सकते हैं आइए शुरू करते हैं –

तुगलक वंश की स्थापना (Tuglak Vansh Ki Sthapana)-

5 सितंबर 1320 को खिलजी वंश (Khilaji Dynasty) का अंत करके  गाजी मलिक ने दिल्ली सल्तनत (Delhi Saltanate) में एक नए वंश तुगलक वंश (Tuglak Dynasty) की स्थापना की |

गाजी मलिक गयासुद्दीन तुगलक के नाम से दिल्ली सल्तनत में तुगलक वंश की स्थापना की और इस इसने खिलजी वंश के शासक खुशरव शाह को पराजित किया |

तुगलक वंश (Tuglak Dynasty) दिल्ली सल्तनत के इतिहास में 1320 से 1414 तक राज किया | तुगलक वंश में कुल 8 शासकों ने लगभग  94 वर्षों तक शासन किया, दिल्ली सल्तनत में अधिक समय तक तुगलक वंश ने शासन किया और इस वंश का अंतिम शासक नसीरुद्दीन महमूद था |

  •  गयासुद्दीन तुगलक (1320-1325 ई.)
  •  मोहम्मद बिन तुगलक (1325-1351 ई.)
  •  फिरोजशाह तुगलक  (1351-1388 ई.)
  •  मोहम्मद खान  ( 1388 ई.)
  •  अबू बकर (1389-1390 ई.)
  •  नसीरुद्दीन मोहम्मद (1390-1394 ई.)
  •  हुमायुँ (1394-1395 ई.)
  •  नसीरुद्दीन महमूद (1395-1414)

गयासुद्दीन तुगलक (1320-1325 ई.)

गयासुद्दीन तुगलक दिल्ली सल्तनत के इतिहास में तुगलक वंश के संस्थापक के रूप में जाना जाता है गयासुद्दीन तुगलक का वास्तविक नाम गाजी मलिक था और इसने खिलजी वंश के अंतिम शासक खुसरो शाह को पराजित किया और दिल्ली में नया वंश तुगलक वंश बसाया | गयासुद्दीन तुगलक दिल्ली सल्तनत  में 5 सितंबर 1320 ई. को सिंहासन पर बैठा, गयासुद्दीन तुगलक एक प्रसिद्ध शासक बना क्योंकि  मंगोलों द्वारा किए गए आक्रमण को 29 बार विफल करने में सक्षम रहा |

गयासुद्दीन तुगलक द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्य एवं सुधार –

  • गयासुद्दीन तुगलक ने दिल्ली के पास में स्थित पहाड़ियों के ऊपर तुगलकाबाद नामक एक शहर बसाया |
  • गयासुद्दीन तुगलक ने सिंचाई हेतु नहरों तथा कुओं का निर्माण करवाया |
  • किसानों की स्थिति में सुधार करना और कृषि योग्य भूमि को बनाने में योगदान दिया
  • 1321 ईस्वी में तेलंगाना अभियान [ राजधानी वारंगल ] सफल बनाया |
  • 1324 ईस्वी में उड़ीसा सफल अभियान जूना खान के नेतृत्व में किया
  • गयासुद्दीन तुगलक ने अपना अंतिम सैन्य अभियान बंगाल में फैली अव्यवस्था को खत्म करने के लिए किया
  • बंगाल में नसरुद्दीन को शासक बनाया
  • ऋण वसूली को बंद करवा दिया
  • भू राजस्व की दर को भी कम करके  1/3 कर दिया
  • सिंचाई के लिए नहरों का निर्माण करने वाला यह एकमात्र पहला शासक बना
  • अमीरों को पद देने में वंशानुगत के अलावा उनकी योग्यता को भी रखा
  • निजामुद्दीन औलिया ने गयासुद्दीन तुगलक से कहा कि दिल्ली अभी दूर है

बंगाल अभियान से लौटते समय एक लकड़ी के घर के गिरने के कारण गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु 1325 ई. हो गई हालांकि कुछ विद्वानों का कहना है कि गयासुद्दीन तुगलक के खिलाफ एक साजिश की गई थी | गयासुद्दीन तुगलक को तुगलकाबाद में दफनाया गया था |

मोहम्मद बिन तुगलक  (1325-1351)

 गयासुद्दीन के मृत्यु के बाद उसका पुत्र “जूना खा” मोहम्मद बिन तुगलक के नाम से सिंहासन पर बैठा  | इसका वास्तविक नाम  उलुग खां था | यह तुगलक वंश के सभी शासकों में सबसे बुद्धिमान, शिक्षित एवं योग्य शासक था | पूरे राज्य में यह घोषित कर दिया कि सभी बुजुर्ग उसके पिता के समान एवं सभी सैनिक उसके भाई के समान हैं इस कारण इसे स्वप्नशील, पागल एवं रक्त पिपासु कहा गया था, इसने अमीर ए कोही नामक एक नए विभाग की स्थापना की यह विभाग किसानों की सहायता के लिए एवं कृषि उत्पादन में बढ़ावा करने के लिए बनाया था

मोहम्मद बिन तुगलक के द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्य

महान इतिहासकार बरनी के अनुसार मोहम्मद बिन तुगलक निम्नलिखित 5 परियोजनाओं पर काम किया
1. राजधानी परिवर्तन
2. सांकेतिक मुद्रा का चलन
3. खुरासान अभियान
4. दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि 
5. कराचिल अभियान

दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि – 1326-1327 ई.

इसने उन क्षेत्रों में कर में वृद्धि की जहां पर भूमि उपजाऊ थी परंतु कुछ ऐसा हुआ कि उस क्षेत्र में भयंकर अकाल पड़ गया था और इसके सैन्य अधिकारी जबरदस्ती कर वसूलने की कोशिश किए तो इस कारण विद्रोह हो गया जिससे यह योजना भी असफल हो गई |

किसानों को बहुत ही कम रेट पर ऋण भी आसानी से उपलब्ध करवा दिया इस कारण भी असफल रहा |

 राजधानी परिवर्तन  –

1327 ई. में मोहम्मद बिन तुगलक राजधानी को दौलताबाद ले गया इसके पीछे इसका मुख्य उद्देश्य था कि यह साम्राज्य को मंगोलों से बचा सके लेकिन इसमें भी असफल रहा, इस योजना के असफल होने का मुख्य कारण यह था कि जब जनता दौलताबाद की ओर गई तो इसने फिर से वापस कर दिया इस कारण आधी जनता आते आधी जनता जाते मर गई इससे इसके साम्राज्य में सैन्य शक्ति में काफी नुकसान भी करना पड़ा 

  • एक योजना बनाई की खुरासान अभियान किया जाए परंतु यह योजना भी असफल रही है |
  •  इसने मुद्रा भी चलाई जिसमें चांदी के स्थान पर टका और पीतल के स्थान पर तांबा चलवाया परंतु वहां के लोगों ने चांदी के सिक्के को घर में रख लिया इससे यह योजना भी असफल हो गई.
  •  मोहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु 20 मार्च 1351 ई. सिंध जाने के उपरांत एक गुडाल में हुई इसकी मौत पर इतिहासकार बदायूंनी ने कहा कि राजा को जनता से और जनता को राजा से मुक्ति मिल गई |
  •  इब्नबतूता मोहम्मद बिन तुगलक के काल में भारत आया और मोहम्मद बिन तुगलक ने इसे अपना दूत बनाकर चीन भेजा, इब्नबतूता की प्रसिद्ध पुस्तक रेहला  है | मोहम्मद बिन तुगलक ने इब्नबतूता को दिल्ली का काजी घोषित किया |
  •  मोहम्मद बिन तुगलक शेख मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर जाने वाला पहला सुल्तान था |

फिरोजशाह तुगलक Firoz Shah Tuglak (1351-1388 ई.)

फिरोजशाह तुगलक, गयासुद्दीन तुगलक का भतीजा था या मोहम्मद बिन तुगलक का चचेरा भाई था, मोहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद फिरोज़ शाह तुगलक दिल्ली का सुल्तान बना |
  • ब्राह्मणों पर सर्वप्रथम जजिया कर लगाने वाला एकमात्र सुल्तान फिरोजशाह तुगलक था
  •  फिरोजशाह तुगलक ने सैनिकों को वेतन के रूप में भूमि दान दिया करता था
  •  फिरोजशाह तुगलक के शासन काल में इसकी सेना में भ्रष्टाचार फैल चुका था
  •  इसने सेना में वंशवाद को ज्यादातर बढ़ावा दिया
  •  फिरोजशाह तुगलक ने मंदिरों के निर्माण एवं मरम्मत पर रोक लगा दी थी |

Note : जजिया कर

  •  जजिया कर एक गैर धार्मिक कर था |
  •  जजिया कर को भारत में सर्वप्रथम मोहम्मद बिन कासिम ने लगाया |
  •  अकबर प्रथम ने जजिया कर को समाप्त कर दिया था परंतु औरंगजेब जजिया कर को पुनः वसूलता है |
  •  फारुखसीआर ने जजिया कर को समाप्त करने के बाद पुनः लगाया |
  • अंतिम रूप से जजिया कर को मोहम्मद शाह ने समाप्त कर दिया |

 फिरोज शाह द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्य

  1.  फिरोजशाह तुगलक ने हिसार, फिरोज शाह कोटला, फतेहाबाद नगर की स्थापना की |
  2.  फिरोजशाह तुगलक ने अपने चचेरे भाई “जूना खा” की याद में जौनपुर नगर की स्थापना की |
  3.  फिरोजशाह तुगलक ने सम्राट अशोक के 2 स्तंभों को दिल्ली मंगवाया और अपनी राजधानी फिरोजाबाद में स्थापित किया |
  4.  दिल्ली मेरठ स्तंभ लेख, दिल्ली टोपरा स्तंभ लेख
  5.  भारतीय इतिहास में यह एक पहला शासक था जिसने रोजगार के लिए एक नया दफ्तर बनवाया  |
  6.  फिरोजशाह तुगलक ने भारत में पांच बड़ी नारों का निर्माण भी करवाया |
  7.  दासों के लिए नए विभाग की स्थापना की इस विभाग को दीवाने बंद गान कहा जाता था |

 फिरोजशाह तुगलक द्वारा कर में सुधार

  1.  फिरोजशाह तुगलक ने 24 कष्टदायक करो को पूरी तरह से समाप्त कर दिया |
  2.  फिरोजशाह तुगलक ने खराज ( लगान ), खुम्स ( युद्ध में लूट का माल ), जजिया कर ( गैर मुसलमानों से लिया जाने वाला कर ), जकात ( मुसलमानों से वसूला जाने वाला कर ) लागू किया |
  3.  फिरोजशाह तुगलक ने चांदी और तांबे के मिश्रण से बने सिक्कों का प्रचलन शुरू करवा दिया |
  4.  तास घड़ियाल नामक एक घड़ी का आविष्कार दिल्ली के सुल्तान फिरोज़ शाह तुगलक ने करवाया
  5.  सुल्तान फिरोजशाह ने कुतुब मीनार की चौथी मंजिल की मरम्मत करवाई तथा कुतुब मीनार की पांचवी मंजिल का निर्माण भी करवाया |
  6.  फिरोजशाह तुगलक ने 300 नए नगरों का स्थापना करवाया 
  7.  सुल्तान फिरोज शाह ने महिलाओं एवं बच्चों के आर्थिक सहायता के लिए दीवान ए खैरात विभाग की स्थापना की |
  8.  फिरोजशाह तुगलक ने पेंशन विभाग दीवान ए एस्तिहॉक की स्थापना की  |
  9.  फिरोजशाह तुगलक ने मदरसों एवं मस्जिदों का निर्माण करवाया जिसमें काली मस्जिद, मदरसा ए फिरोजशाही, बेगमपुरी तथा कला मस्जिद का निर्माण करवाया |
  10.  अलाई दरवाजा का निर्माण फिरोजशाह तुगलक ने करवाया | इसने इल्तुतमिश के मकबरे का निर्माण करवाया तथा जामा मस्जिद का निर्माण करवाया | 
  11.  फिरोज शाह ने जगन्नाथ पुरी मंदिर को क्षति पहुंचाई
  12.  फिरोजशाह तुगलक ने एक खैराती अस्पताल का भी निर्माण करवाया जिसका नाम दारुल सफा था
  13.  फिरोजशाह तुगलक की आत्मकथा फारसी में फतुहात ए फिरोजशाही किताब में लिखी गई है |
  14.  फिरोजशाह तुगलक द्वारा नहरों के निर्माण को याहिया बिन आमद सर हिंदी की पुस्तक तारीख ए फिरोजशाही में लिखी गई है |
  15.  यह सल्तनत का पहला शासक था जिसने खलीफा का नया घोषित किया और मुस्लिम महिलाओं को बाहर की मजारों पर जाने से रोक लगाया |
  16.  फिरोज शाह द्वारा किए गए सभी अभियान उसके साम्राज्य को बचाना था ना कि साम्राज्य का विस्तार करना |
फिरोज शाह ने बंगाल एवं सिंध पर मुख्य रूप से आक्रमण किया जिसमें बंगाल का प्रथम आक्रमण 1353 ईस्वी में किया गया असफल होने के कारण 1355 में वापस लौट जाता है पुणे बंगाल पर द्वितीय आक्रमण भी करता है यह आक्रमण वर्ष 1359 में किया गया परंतु इसमें भी असफल रहा | इस दौरान उसने उड़ीसा पर आक्रमण कर दिया वहां के शासक वीर भानु देव तृतीय को हराया और ज्वालामुखी मंदिर, जगन्नाथ मंदिर  को ध्वस्त कर दिया |
फिरोजशाह तुगलक की मृत्यु के बाद उसका पुत्र फतेह खान का पुत्र तुगलक शाह गयासुद्दीन तुगलक द्वितीय की उपाधि धारण करके दिल्ली की सत्ता में बैठा परंतु यह एक viलास प्रवृत्ति का पाया जाता है इस कारण वहां के सरदार इसकी हत्या कर देते हैं और फिरोज के पुत्र जफर खान के पुत्र अबू वक्र शाह को दिल्ली का सुल्तान बना दिया | इसी दौरान अबू वक्र और मोहम्मद शाह के बीच संघर्ष हुआ और इस संघर्ष के दौरान मोहम्मद शाह दिल्ली की सत्ता में आता है |
नसरुद्दीन मोहम्मद शाह 1390-1394 ई. तक दिल्ली का सुल्तान रहा और किसके काल में ही इटावा और गुजरात में विद्रोह देखने को मिला | इसकी मृत्यु के बाद इसका पुत्र हुमायूं को दिल्ली का सुल्तान बनाया जाता है हुमायूं अलाउद्दीन सिकंदर शाह की उपाधि धारण करके दिल्ली की गद्दी पर बैठा और यह मात्र 16 दिन ही शासन कर पाया |
सिकंदर की मृत्यु के बाद उसके भाई नसरुद्दीन महमूद को दिल्ली का सुल्तान बना दिया गया और यह तुगलक वंश का अंतिम शासक सिद्ध हुआ |
 नसीरुद्दीन महमूद के काल में तैमूर लंग ने भारत पर आक्रमण किया और दिल्ली सत्ता को तहस-नहस कर दिया और इसके वापस जाते ही पुनः नसरुद्दीन महमूद, मल्लू इकबाल की सहायता से  दिल्ली की गद्दी पर बैठ जाता है परंतु मल्लू इकबाल की मृत्यु हो जाने के बाद दौलत खान लोदी को शासन की जिम्मेदारी दे दिया | 1412 इस फिल्म में नसीरुद्दीन महमूद की मृत्यु हो जाती है और दौलत खां लोदी यहां का सुल्तान बन जाता है परंतु कुछ ही समय बाद खिज्र खां ने दिल्ली पर आक्रमण कर दिया और दौलत खान लोदी को पराजित करके एक नए वंश सैयद वंश की स्थापना की |
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