शिक्षा मनोविज्ञान का अर्थ, परिभाषा, क्षेत्र एवं प्रकृति | Educational Psychology in hindi

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Educational Psychology in hindi : इस लेख में आप शिक्षा मनोविज्ञान का अर्थ, परिभाषा, क्षेत्र एवं प्रकृति तथा इसकी उपयोगिता को समझेंगे. Educational Psychology की Meaning, Definitions, Nature and Scope को समझना आसान है. गांधी जी के अनुसार शिक्षा का तात्पर्य “व्यक्ति के शरीर, मन और आत्मा के समुचित विकास से है।” अंग्रेजी का Psychology शब्द दो शब्दों ‘Psyche’ और ‘logus’ से मिलकर बना है। ‘Psyche’ का अर्थ है ‘आत्मा’ और ‘logus’ का अर्थ है ‘विचार-विमर्श’। अर्थात आत्मा के बारे में विचार-विमर्श या अध्ययन मनोविज्ञान में किया जाता है।

शिक्षा मनोविज्ञान का अर्थ (Meaning of Psychology)

शिक्षा को अंग्रेजी में Education कहते हैं जो लैटिन भाषा के Educatum का रूपान्तर है जिसका अर्थ है to bring up together हिन्दी में शिक्षा का अर्थ ‘ज्ञान’ से लगाया जाता है। गांधी जी के अनुसार शिक्षा का तात्पर्य “व्यक्ति के शरीर, मन और आत्मा के समुचित विकास से है।” अंग्रेजी का Psychology शब्द दो शब्दों ‘Psyche’ और ‘logus’ से मिलकर बना है। ‘Psyche’ का अर्थ है ‘आत्मा’ और ‘logus’ का अर्थ है ‘विचार-विमर्श’। अर्थात आत्मा के बारे में विचार-विमर्श या अध्ययन मनोविज्ञान में किया जाता है। शिक्षा मनोविज्ञान से तात्पर्य शिक्षण एवं सीखने की प्रकिया को सुधारने केे लिए मनोवैज्ञानिक सिद्धान्तों का प्रयोग करने से है। शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षिक परिस्थितियों में व्यक्ति के व्यवहार का अध्ययन करता है।

shiksha manovigyan ka arth paribhasha visheshta : शिक्षा-मनोविज्ञान की शुरुआत प्लेटो के समय से मानी जाती है। रूसो के शिक्षा दर्शन ने आगे बढ़ाने पर बल दिया और मांटेसरी ने इसे आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया। इसकी उत्पत्ति सन् 1900 से मानी जाती हैं। थाॅर्नडाइक, टर्मन, स्टेनले हाॅल, जुड आदि के प्रयासों से शिक्षा-मनोविज्ञान को एक स्पष्ट स्वरूप मिला। पेस्टोलाजी को शिक्षा-मनोविज्ञान में ‘वैज्ञानिकीकरण का जनक’ माना जाता है। फ्राॅयड एवं हरबर्ट ने शिक्षा-मनोविज्ञान के क्षेत्र में उपरोक्त लोगों के प्रयास को और आगे बढ़ाने मे सहायता की।

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शिक्षा-मनोविज्ञान दो शब्दों के योग से बना हैं,” शिक्षा+मनोविज्ञान। अतः शिक्षा मनोविज्ञान का शाब्दिक अर्थ है,” शिक्षा संबंधी मनोविज्ञान। दूसरे शब्दों में, शिक्षा मनोविज्ञान, मनोविज्ञान का व्यावहारिक रूप है तथा शिक्षा की प्रक्रिया में मानव व्यवहार का अध्ययन करने वाला विज्ञान है।

शिक्षा मनोविज्ञान के अध्ययन का केंद्र शैक्षणिक परिस्थतियों में मानव व्यवहार है। इस मनोविज्ञान को हम कला और विज्ञान दोनों ही श्रेणियों मे रख सकते है। इसमे कोई संदेह नही है कि इसकी प्रकृति वैज्ञानिक है क्योंकि अध्ययन के लिए वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है। शिक्षा मनोविज्ञान के अंतर्गत बालक का शिक्षा से संबंधित संपूर्ण व्यवहार (Behavior) एवं व्यक्तित्व (Personality) आ जाता है। शिक्षा मनोविज्ञान के ज्ञान द्वारा शिक्षक बालच की व्यक्तिगत विभिन्नताओं का ज्ञान प्राप्त करके उचित शिक्षण विधियों का प्रयोग करता है तथा कक्षा-कक्ष का अनुशासन भी बनाए रखता है। अतः इस प्रकार से शिक्षा मनोविज्ञान के क्षेत्र में मूल प्रकृतियों, अनुशासन और अधिगम (सीखना) का अध्ययन किया जाता हैं। शिक्षा मनोविज्ञान एक शिक्षक के लिए मूल्यवान हैं क्योंकि शिक्षा मनोविज्ञान के द्वारा उसे विद्यार्थी के बारे में पूर्ण ज्ञान प्राप्त होता है। जिससे वह अपने शिक्षण को अधिक प्रभावी बना सकता हैं।

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शिक्षा मनोविज्ञान की परिभाषा (Definition of Educational Psychology)

स्किनर (Skinner 1958) के अनुसार – “शिक्षा मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की वह शाखा है जो शिक्षण एवं अधिगम से सम्बन्धित है।”

क्रो एवं क्रो (Crow and Crow 1973) के अनुसार – “शिक्षा मनोविज्ञान जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक के अधिगम अनुभवों का विवरण एवं व्याख्या देता है।”

सारे व टेलफोर्ड के अनुसार,” शिक्षा मनोविज्ञान का मुख्य संबंध सीखने से हैं। यह मनोविज्ञान का वह अंग है जो शिक्षा के मनोवैज्ञानिक पहलुओं की वैज्ञानिक खोज से विशेष रूप से संबंधित है।”

ऐलिस क्रो के अनुसार,” शैक्षिक मनोविज्ञान मानव प्रतिक्रियाओं के शिक्षण और सीखने को प्रभावित करता है एवं वैज्ञानिक दृष्टि से व्युत्पन्न सिद्धांतों के अनुप्रयोग का प्रतिनिधित्व करता हैं।”

कालसेनिक के अनुसार,” मनोविज्ञान के अनुसंधानों व सिद्धांतों का शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग ही शिक्षा मनोविज्ञान हैं।”

स्टीफन के अनुसार,” शिक्षा मनोविज्ञान बालक के शैक्षिक विकास का क्रमबद्ध अध्ययन हैं।

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थार्नडाइक के अनुसार,” शिक्षा मनोविज्ञान के अंतर्गत शिक्षा से संबंधित व्यवहार और व्यक्तित्व आ जाता है।”

सी.एच.गुड के अनुसार,” शिक्षा मनोविज्ञान जन्म से लेकर परिपक्व अवस्था तक विभिन्न परिस्थितियों में गुजरते हुए व्यक्तियों में होने वाले परिवर्तनों की व्याख्या हैं।”

स्टाउट के अनुसार,” मनोविज्ञान द्वारा शिक्षा सिद्धांतों को दिया जाने वाला मुख्य सिद्धांत यह है कि नवीन ज्ञान का विकास पूर्व ज्ञान के आधार पर किया जाना चाहिए।”

ट्रो के अनुसार,” शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षिक परिस्थितियों के मनोवैज्ञानिक तत्वों का अध्ययन करता हैं।”

जेम्स ड्रेवर के अनुसार,” शिक्षा मनोविज्ञान व्यवहारिक मनोविज्ञान की वह शाखा है जो शिक्षा मे मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों तथा खोजों के प्रयोग के साथ ही शिक्षा की समस्याओं के मनोविज्ञानिक अध्ययन से संबंधित है।

विभिन्न विद्वानों द्वारा शिक्षा मनोविज्ञान की परिभाषाओं का अध्ययन करने के बाद यह कहा जा सकता है कि शिक्षा मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की ही एक शाखा है जो शैक्षणिक परिस्थितियों का मनोवैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करती है। शैक्षिक प्रक्रिया में शिक्षा मनोविज्ञान व्यक्ति के सीखने संबंधी व्यवहार का विश्लेषण करती है तथा उनके विकास व निर्देशन मे योगदान देती हैं।

इस प्रकार शिक्षा मनोविज्ञान में व्यक्ति के व्यवहार, मानसिक प्रकियाओं एवं अनुभवों का अध्ययन शैक्षिक परिस्थितियों में किया जाता है। शिक्षा मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की वह शाखा है जिसका ध्येय शिक्षण की प्रभावशाली तकनीकों को विकसित करना तथा अधिगमकर्ता की योग्यताओं एवं अभिरूचियों का आंकलन करना है। यह व्यवहारिक मनोविज्ञान की शाखा है जो शिक्षण एवं सीखने की प्रकिया को सुधारने में प्रयासरत है।

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शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति (Nature of Educational Psychology)

शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति वैज्ञानिक (scientific) होती है। क्योंकि शैक्षिक वातावरण में अधिगमकर्ता (Learner) के व्यवहार का वैज्ञानिक विधियों, नियमों तथा सिद्धांतों के माध्यम से अध्ययन किया जाता है. यह विधायक (Constitative) और नियामक (Regulative) दोनों प्रकार का विज्ञान है। विधायक विज्ञान तथ्यों (Facts) पर जबकि नियामक विज्ञान मुल्यांकन (assessment) पर आधारित होता है.

शिक्षा का स्वरूप संश्लेषणात्मक (Synthetic) होता है, जबकि शिक्षा मनोविज्ञान का स्वरूप विश्लेषणात्मक (analytic) होता है. शिक्षा मनोविज्ञान एक वस्तुपरक विज्ञान (Material science) है. शिक्षा मनोविज्ञान व्यवहार का विज्ञान (Science of behavior) क्योंकि इसमें शैक्षणिक परिस्थिति के अंतर्गत बालक के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है.

शैक्षणिक परिस्थितियों के अंतर्गत बालक के व्यवहार का अध्ययन करना ही शिक्षा मनोविज्ञान की विषय वस्तु (theme) है। शिक्षा मनोविज्ञान का सीधा संबंध शिक्षण में अधिगम क्रियाकलापों से है।

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शिक्षा मनोविज्ञान का कार्य क्षेत्र (Scope of Educational Psychology)

शिक्षा की महत्वपूर्ण समस्याओं के समाधान में मनोविज्ञान मदद करता है और यही सब समस्याएं व उनका समाधान शिक्षा मनोविज्ञान का कार्य क्षेत्र बनते है –

(1). शैक्षिक निर्देशन एवं परामर्श― अध्यापक का एक पुनीत कार्य है। विद्यार्थी के विद्यालय तथा व्यक्तिगत जीवन में अनेक अवसर आते हैं जब उन्हें सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। बहुत सी ऐसी व्यक्तिगत समस्याएं हैं जिनके संदर्भ में बालक को अध्यापकों की सहायता चाहिए होती है। शैक्षिक और वेबसाइट क्षेत्र में विद्यार्थियों को निर्देशित करना अध्यापकों का दायित्व है।कक्षा में समायोजन विद्यार्थियों को भी निर्देशन और मार्गदर्शन देना पड़ता है। निर्देशन और परामर्श के लिए विद्यार्थियों के वातावरण, अधिगम के स्तर, स्मृति, आदत, योग्यताओं, बुद्धि, व्यक्तिगत भिन्नता, मानसिक स्वास्थ्य आदि का अध्ययन करना आवश्यक है। यह सब मनोविज्ञान का अध्ययन क्षेत्र है।

(2). पाठ्यक्रम निर्माण― सभी छात्रों के लिए एक सा पाठ्यक्रम नहीं बनाया जा सकता। पाठ्यक्रम का निर्माण बालको की रुचियों, अभिरुचियों, आवश्यकताओं, आयु, बुद्धि, क्षमताओं के अनुसार किया जाना चाहिए क्योंकि सभी छात्रों में व्यक्तिगत विभिन्नता होती है।

(3). अध्ययन विधियां― शिक्षा मनोविज्ञान अभी विकास की प्रक्रिया में है। अब तक विद्यमान अनेक पद्धतियां अनेक स्थानों पर अध्ययन के लिए उपयुक्त नहीं बैठती हैं। अध्ययन की विभिन्न विधियों की खोज करना एवं प्रचलित विधियों में अपेक्षित सुधार करना भी इसके अंतर्गत आता है। शिक्षा मनोविज्ञान एक नया विज्ञान है इसके अंतर्गत निरंतर विकास हो रहा है लेकिन इसका विषय क्षेत्र सीमित नहीं है।

(4). सीखना― शिक्षा जगत की यह समस्या रहती है कि शिक्षक यह जाने की बालक कैसे सीखते हैं? उनके सीखने को कैसे प्रभावशाली बनाया जा सकता है? शिक्षा मनोविज्ञान में सीखने से संबंधित निम्नलिखित बातों का अध्ययन किया जाता है- सीखने के नियम, सीखने के सिद्धांत, सीखने को प्रभावित करने वाले तत्व, शिक्षा का स्थानांतरण आदि।

(5). समूह मनोविज्ञान― अब किसी भी देश में बालकों को समूह रूप में पढ़ाया जाता है। शिक्षा मनोविज्ञान में व्यक्ति के अध्ययन के साथ उसके समूह का अध्ययन भी किया जाता है। समूह में व्यक्ति का व्यवहार क्यों बदल जाता है और कैसे बदलता है इस सब का अध्ययन भी किया जाता है।

(6). मापन और मूल्यांकन― शिक्षा मनोविज्ञान में शैक्षिक उपलब्धि एवं विशेष योग्यता का मापन तथा बुद्धि, चरित्र, व्यक्तित्व संबंधी मापन के लिए विभिन्न साधनों विधियों परीक्षणों और सांख्यिकीय कार्यों का प्रयोग किया जाता है। सीखने की प्रक्रिया में अध्यापकों को बालक की बुद्धि, व्यक्तित्व तथा विभिन्न योग्यताओं का ज्ञान आवश्यक है इन सबका मापन शिक्षा मनोविज्ञान के क्षेत्र में आता है।

(7). अभिवृद्धि एवं विकास― शिक्षा मनोविज्ञान में मनुष्य की शारीरिक अभिवृद्धि और शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक, सामाजिक विकास का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। इसमें मानव अभिवृद्धि तथा विकास का अध्ययन चार कालो― शैशवावस्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था, प्रौढ़ावस्था के क्रम में किया जाता है। इसमें मनुष्य के विकास में उसके वंशानुक्रम और पर्यावरण की भूमिका का अध्ययन भी किया जाता है।

(8). मानसिक स्वास्थ्य एवं समायोजन― मनोविज्ञान ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की शिक्षा एवं विकास में बच्चों एवं अध्यापकों के मानसिक स्वास्थ्य तथा उनके समायोजन की क्षमता की अहम भूमिका रहती है। शिक्षा मनोविज्ञान में बालको और अध्यापकों के मानसिक विकास में बाधक एवं दुविधा पहुंचाने वाले तत्वों का अध्ययन किया जाता है। और साथ ही कुसमायोजन के कारणों और विधियों का भी अध्ययन किया जाता है।

मनोविज्ञान का शिक्षा में योगदान (Contribution of Psychology to Education)

  • बालक का महत्व।
  • बालकों की विभिन्न अवस्थाओं का महत्व।
  • बालकों की रूचियों व मूल प्रवृत्तियों का महत्व।
  • बालकों की व्यक्तिगत विभिन्नताओं का महत्व।
  • पाठ्यक्रम में सुधार।
  • पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाओं पर बल।
  • सीखने की प्रक्रिया में उन्नति।
  • मूल्यांकन की नई विधियां।
  • शिक्षा के उद्देश्य की प्राप्ति व सफलता।
  • नये ज्ञान का आधारपूर्ण ज्ञान।
  • शिक्षा मनोविज्ञान का केंद्र, मावन-व्यवहार हैं।
  • शिक्षा मनोविज्ञान, खोज तथा निरीक्षण से प्राप्त किये तथ्यों का संग्रह हैं।
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शिक्षा मनोविज्ञान की विशेषताएं (shiksha manovigyan ki visheshta)

शिक्षा मनोविज्ञान की निम्नलिखित विशेषताएं हैं–

1. शिक्षा मनोविज्ञान की विषय सामग्रि का मुख्य उद्देश्य मानवीय व्यवहार को निर्देशित एवं संशोधित करना है।

2. शिक्षा मनोविज्ञान एक व्यवहारिक विज्ञान है जिसका प्रयोग व्यक्ति के व्यवहार को समझकर उसके अनुसार शिक्षण प्रदान किया जाता है।

3. शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति वैज्ञानिक (Scientific) होती है। क्योंकि बालक के व्यवहार का अध्ययन वैज्ञानिक विधियों, नियमों एवं सिद्धांतों के आधार पर शैक्षणिक वातावरण में किया जाता हैं।

4. शिक्षा-मनोविज्ञान की विभिन्न मनोवैज्ञानिक अवधारणाओं का शिक्षा के क्षेत्र में अनुप्रयोग किया जाता हैं।

5. शिक्षा-मनोविज्ञान एक वस्तुपरक विज्ञान हैं।

6. शिक्षा मनोविज्ञान के अंतर्गत मनोवैज्ञानिक बालक के पूर्ण व्यवहार का अध्ययन करता है, आँकड़े इकट्ठा करता है, खोज करता है तभी किसी निर्णय पर पहुँचता है। अतः शिक्षा-मनोविज्ञान एक प्रकार से प्रकृति विज्ञान हैं।

7. शिक्षा मनोविज्ञान छात्रों के व्यवहार में अपेक्षित परिवर्तन लाने मे सक्षम है।

8. शिक्षा-मनोविज्ञान में सकारात्मक रूप से यह अध्ययन किया जाता हैं कि बालक का व्यवहार कैसा है और कैसा होना चाहिए। इसलिए यह एक सकारात्मक विज्ञान है।

9. शिक्षा-मनोविज्ञान के अंतर्गत शिक्षक छात्र के व्यवहार और प्रकृति के आधार पर मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के द्वार अधिक बेहतर परिणाम देने का प्रयास करता है जिससे उसका अधिकतम विकास हो सके। इसलिए इसे विकास का विज्ञान भी कहा जाता है।

10. शिक्षा-मनोविज्ञान में शिक्षक पहले से विद्यमान वैज्ञानिक ज्ञान का प्रयोग और अधिक व्यवहारिक शिक्षण के संपादन के लिए करता है। इसलिए यह एक व्यवहारिक या अनुप्रयुक्त विज्ञान (Applied Science) भी हैं।

11. शिक्षा मनोविज्ञान में छात्र और शिक्षक का संबंध अधिक घनिष्ठ हो जाता है।

12. शिक्षा-मनोविज्ञान एक सामाजिक विज्ञान है। क्योंकि यह मानव समाज का अध्ययन भी करता है।

13. शिक्षा मनोविज्ञान शिक्षा और मनोविज्ञान को जोड़ने की कड़ी हैं।

14. शिक्षा मनोविज्ञान का सीधा संबंध शिक्षण में सीखने से हैं।

15. शिक्षा-मनोविज्ञान बालक के जन्म से पूर्व ही उसके अध्ययन की शुरुआत कर देता है।

16. शिक्षा-मनोविज्ञान का प्रयोग व्यक्तियों के व्यवहार का अध्ययन एवं विश्लेषण करने में किया जाता हैं।

17. शिक्षा-मनोविज्ञान का प्रत्यक्ष संबंध शैक्षिक प्रक्रिया के समस्त क्रिया-कलापों से हैं।

18. शिक्षा-मनोविज्ञान व्यक्ति के व्यवहार का व्यक्तिगत एवं सामूहिक दोनों प्रकार से अध्ययन करता है।

19. शिक्षा-मनोविज्ञान तथ्यों तथा मूल्यांकन दोनों पर आधारित होता है इसलिए इसे विधायक (Constitative) एवं नियामक (Regulative) दोनों प्रकार का विज्ञान माना जाता है।

20. शिक्षा-मनोविज्ञान की प्रकृति विश्लेषणात्मक होती है। क्योंकि शिक्षा-मनोविज्ञानिक छात्रों की जटिल जानकारियों को क्रमबद्ध या तालिकाबद्ध या तार्कित दृष्टिकोण से निरूपित करता है तत्पश्चात् जानकारियों पर आधारित प्रश्नों का उत्तर प्राप्त करता हैं, तथा छात्र की समस्याओं का निराकरण करता हैं।

21. शिक्षा मनोविज्ञान मानवीय व्यवहारों का शैक्षिक परिस्तिथियों मे अध्ययन करता है। इस प्रकार यह व्यवहार का विज्ञान है।

22. शिक्षा-मनोविज्ञान का सीधा संबंध शिक्षण मे अधिगम क्रियाकलापों से होता हैं।

निष्कर्ष : उम्मीद है अब आपको शिक्षा मनोविज्ञान का अर्थ, परिभाषा, क्षेत्र एवं प्रकृति (Educational Psychology in hindi) से जुड़ी जानकारी मिल गयी होगी. ऐसी पोस्ट के लिये allindiafreetest.com पर विजिट करते रहें. यदि आपको किसी टॉपिक विषय के notes चाहिए तो कमेंट में लिखें.