समाजीकरण | Socialization in hindi | सामाजीकरण क्या है | अर्थ एवं परिभाषा

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समाजीकरण | Socialization in hindi : यदि आप CTET UPTET SUPER TET या अन्य टीचिंग EXAM की तैयारी कर रहें है और Chandra Institute CTET Notes या UPTET Notes search कर रहें हैं तो ये टॉपिक समाजीकरण क्या है? अर्थ एवं परिभाषा बहुत खास है आज आप इसी के बारे में विस्तारपूर्वक जानेंगे –

एक बच्चा जब जन्म लेता है तो वह न तो सामाजिक होता है और न ही असामाजिक लेकिन जैसे जैसे वह बड़ा होता है समाज के रीति रिवाजो को सीखता है। इसमें आप समाजीकरण की परिभाषा, समाजीकरण का उद्देश्य, समाजीकरण का महत्त्व, समाजिकरण की विशेषता, समाजीकरण के प्रकार आदि के बारे में जानेंगे। ऐसी ही पोस्ट के लिये ALLINDIAFREETEST.COM पर SEARCH करें अपने करियर से सम्बन्धित टॉपिक आईये जानते है समाजीकरण क्या है? (socialization in hindi) के बारे में.

 

सामाजीकरण क्या है (Samajikaran Kya Hai)

Samajikaran kya hai : समाजीकरण एक प्रक्रिया है जो बच्चे के जन्म के बाद शुरू होती है। यह बच्चे में धीरे धीरे विकसित होती है। मनुष्य एक समाजिक प्राणी है और समाज में रहने के लिये समाज के नियम, रीति रिवाज, समाजिक मूल्यों, नैतिक मूल्यों, संस्कृति, विश्वास, मनोवृति एवं विभिन्न प्रकार के कौशल आदि सीखता है। समाजीकरण वातावरण से प्रभावित होता है न की अनुवंशिकता से।

समाजीकरण (what is socialization) : समाजीकरण एक प्रक्रिया है जो मनुष्य समाज में रहने के लिये सीखता है। समाज में व्यक्ति अपने आस पास के वातावरण के साधनों से प्रभावित होता है और धीरे धीरे उन गुणों को सीखता है। इस प्रक्रिया को समाजीकरण कहते है।

Socialization is a process that human beings learn to live in the society. In society, a person is influenced by the resources of the environment around him and gradually learns those qualities. This process is called socialization.

समाजीकरण की प्रक्रिया (process of socialization) जीवन पर्यन्त चलती रहती है। समाजीकरण बालक के विकास के लिये महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिससे वह समाजिक प्राणी बनता है। समाज से व्यक्ति अत्यधिक प्रभावित भी होता है यही से उसके संवेगो का भी विकास होता है। क्योंकि समाज से ही सीखता है कि उसे दूसरों की मदद करणी चाहिए और दुखो में शामिल होता है उसके सुखो में साथ होता है तो इस प्रकार समाजीकरण क्या है (samajikaran kya hai in hindi) अपने समझा अब समाजीकरण का अर्थ एवं परिभाषा जानिए –

 

समाजीकरण का अर्थ (Smajikaran ka Arth)

Smajikaran ka Arth : समाजीकरण का अर्थ है व्यक्ति समाज में रहकर समाज के मूल्यों, आदर्शो, रीति-रिवाज़, विभिन्न व्यवहार एवं गतिविधियाँ इत्यादि को सीखता है । समाजीकरण बच्चे के विकास के लिये आवश्यक है। मनुष्य का रूपांतरण जैविक अस्तित्व से सामाजिक अस्तित्व में सामाजीकरण के माध्यम से ही होता है। सामाजीकरण अपनी संस्कृति को आत्मसात् करने की प्रक्रिया है।

What is socialization in english : Socialization means that a person learns the values, ideals, customs, various behavior and activities etc. of the society by living in the society. Socialization is essential for the development of the child. The transformation of man from biological existence to social existence takes place only through socialization. Socialization is the process of assimilating one’s culture.

 

समाजीकरण की परिभाषा (Smajikaran ki Paribhasha)

समाजीकरण की परिभाषा अलग अलग विद्वानो ने अलग अलग दी है कुछ परिभाषाएं यहां हम नीचे दे रहें हैं जो परीक्षा के दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं.

जॉनसन के अनुसार 

यह एक प्रकार से सीखने की प्रक्रिया है जिसके कारण शिक्षणार्थी सामाजिक जिम्मेदारी को करने योग्य बन जाता है।

It is a kind of learning process due to which the learner becomes capable of doing social responsibility.

बोगार्ड्स के अनुसार 

समाजीकरण एक सामूहिक कार्य है इससे सामुदायिक भावना का विकास होता है। इससे व्यक्तियों के कल्याण हेतु मार्गदर्शन मिलता है।

Socialization is a collective work, it develops community spirit. This gives guidance for the welfare of individuals.

लुंडवर्ग के अनुसार 

यह एक जटिल प्रक्रिया है। जिसे व्यक्ति विशेष सामुदायिक कार्यों में प्रतिभाग करने के लिए सामाजिक मानकों को अपने अन्दर ग्रहण करता है।

It is a complex process. Which a person imbibes social norms for participating in particular community functions.

हार्ट एवम हाट के अनुसार

समाजीकरण के कारण व्यक्ति आत्म शक्ति /आत्मविश्वास से अपने सामुदाय के प्रतिमानो को ग्रहण करता है। जो व्यक्ति की अपनी व्यक्तिगत पहचान बनाने में मदद करती है।

Due to socialization, a person accepts the norms of his community with self-confidence / self-confidence. Which helps a person to create his personal identity.

स्टीवर्ट एवं ग्रीन के अनुसार 

इस प्रक्रिया के द्वारा व्यक्ति अपनी संस्कृति के प्रतिमानों एवं प्रथाओं को आत्मसात करता है।

Through this process the individual assimilates the norms and practices of his culture.

टालकाट पारसन्स के अनुसार

लोगों के द्वारा सामाजिक प्रतिमानों एवं मानदंडों को प्राप्त कर उनको आत्मसात करने की प्रक्रिया समाजीकरण कहलाती है।

The process of assimilation of social norms and norms by people is called socialization.

हरलम्बोस के अनुसार

जिस प्रक्रिया के द्वारा व्यक्ति संस्कृति को ग्रहण करता है अथवा सीखता है, वही समाजीकरण के नाम से प्रचलित है।

The process by which a person acquires or learns culture is known as socialization.

 

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समाजीकरण की संक्षिप्त परिभाषा | Definition of Socialization in Hindi

socialization : उपयुक्त परिभाषा के आधार पर हम कह सकते हैं कि सामाजीकरण एक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से व्यक्ति सामाजिक परम्पराओं तथा प्रतिमानों को ग्रहण करता है। और मानव द्वारा सीखे हुए व्यवहार को अपने व्यवहार में लाता है। जिससे उसके व्यक्तित्व का विकास होता है और व्यक्ति एक सामाजिक सदस्य के रूप में पहचान बनाता है। यही कारण ही आज समाज में एकता और अखंडता बनी है।

 

समाजीकरण की विशेषतायें | Samajikaran ki Visheshata

Samajikaran ki Visheshta : यह जीवन पर्यन्त चलती रहती है। समाजीकरण सीखने एक सीखने की प्रक्रिया है। यह अपनी संस्कृति, रीति रीवाज, परम्परा, धर्म, पहनावे, आदर्शो आदि को आत्मसात् करने की प्रक्रिया है। इसके द्वारा व्यक्ति बोलना, चलना, खाना तथा कपड़ा पहनना, पढ़ना लिखना आदि क्रियाएं समाज से सीखता है। समाजीकरण में परिवेश, अध्यापक, परिवार एवं दोस्तों तथा रिश्तेदारों का योगदान होता है।

 

समाजीकरण का महत्व क्या है?

भाषा (language) : समाजिकरण में भाषा का अहम रोल है। व्यक्ति समाज में रहकर भाषा के द्वारा आसानी से उन तमाम पहलुओं को समझता है और आपस में ताल मेल स्थापित करता है।

परिवार (Family) : समाजीकरण में परिवार की भूमिका अहम होती है। दूसरे शब्दों में कहे तो बालक परिवार तथा पड़ोस के लोगों को जिस प्रकार का व्यवहार करते हुए देखता है, उसी प्रकार का अनुकरण करने लगता है। इसमें रिश्तेदार, दोस्त और परिवार में माता पिता, भाई बहन, चाचा चाची, दादा दादी आदि लोगों के द्वारा बच्चा अनुशासन सीखता है। माता पिता से संस्कार और व्यवहार परिलक्षित होते हैं।

विद्यालय (School) : परिवार के बाद बच्चों को विद्यालय में प्रवेश मिलता है। इसमें बच्चे का विकास विद्यालयी वातावरण और शिक्षक के व्यवहार पर निर्भर होता है क्योंकि अध्यापक ही शिक्षा के द्वारा बच्चे में वे सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्य पैदा करता है, जो समाज एवं संस्कृति में मान्य होते हैं। स्कूल में खेल प्रक्रिया द्वारा बच्चे सहयोग करना , अनुशासन, सामूहिक कार्य आदि सीखते हैं। इसलिए विद्यालय का वातावरण कैसा है उसके दोस्त कैसे हैं। इनसे भी बच्चा प्रभावित होता है।

उत्सव (त्यौहार) : बच्चे के समाजिक विकास में त्यौहार भी महत्व रखते हैं क्योंकि जिस प्रकार के उत्सव वह मनाता है उसी को फॉलो भी करता है और बड़ा होकर उसी प्रकार से व्यवहार करता है।

इसके अलावा उसका बौद्धिक विकास एवं संवेगो का विकास भी इसमें महत्वपूर्ण होता है।

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समाजीकरण के स्तर (Stages of Socialization)

  • मौखिक अवस्था (Oral Stage)
  • शैशव अवस्था (Anal Stage)
  • तादात्मीकरण की अवस्था (Identification Stage)
  • किशोरावस्था (Adolescene Stage)
  • वयस्क अवस्था (Adult hood)
  • वृद्धावस्था (Old Age)

मौखिक अवस्था (Oral Stage)

इसे मौखिक अवस्था इसीलिए कहा जाता है क्योंकि बच्चा जब माँ के गर्भ से बाहर आता है तो उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है जैसे गिलापन, भूख लगने पर चिलाना यानि अपनी सारी समस्याओं को बच्चा रोकर या मुख के हावभाव से प्रकट करता है। वह अपनी माँ के अलावा अभी किसी को नहीं जान पाता है इसलिए माँ को देखकर हाथों से इशारा करता है।

शैशव अवस्था (Anal Stage)

इस अवस्था में माता की दोहरी भूमिका होती है एक तरफ परिवार को संभालती है तो एक तरफ बच्चे की देखरेख करती है। इसमें बच्चा थोड़ा बहुत स्थान के बारे में जानने लगता है और अब ठीक से परिवार के लोगों को पहचानने लगता है।

तादात्मीकरण की अवस्था (Identification Stage)

यह 4 वर्ष से लेकर 12 वर्ष तक का समय होता है जब बच्चा अलग अलग प्रकार की चीजे सीखता है इसमें वह खेल कूद भी करना सीख जाता है। और इस अवस्था में उसे यौनशिक्षा के बारे में जानकारी नहीं होती है भले ही वह शारीरिक विभिन्नताओं को देखता है लेकिन अन्तर नहीं कर पाता हैं किन्तु आगे चलकर उसे ज्ञात होने लगता है।

किशोरावस्था (Adolescene Stage)

यह 13 वर्ष से 18 वर्ष तक का समय होता है। इसमें बच्चा अपने माता पिता से स्वतंत्र रहना चाहते हैं और इसमें बच्चे में शारीरिक विभिन्नता होती है इस कारण उनमें हार्मोन बदलने लगता है। इस अवस्था को स्टेनले हाल ने तनाव एवं तूफान की अवस्था कहा है।

वयस्क अवस्था (Adult hood)

इसमें वह समाज में अलग स्थान में रहना पसंद करता है। इस अवस्था में उसकी शादी और बच्चे होते हैं तो उसके अन्दर माता पिता बनने के गुण विकसित हो जाते हैं तथा एक वयस्क व्यक्ति होता है। यह अवस्था उसके लिये संघर्ष की अवस्था होती है जिसमें वह अपने पिता या माता बनने की जिम्मेदारी को निभाता है। इसमें सामजिक उत्तर दायित्व अधिक होते हैं।

वृद्धावस्था (Old Age)

इसमें व्यक्ति अब दादा, दादी, नाना नानी, ससुर, सास आदि के गुण आ जाते हैं क्योंकि अब उसकी उम्र 40 वर्ष से अधिक की होती है। इस प्रकार उसके बुद्धि, शारीरिक रूप में परिवर्तन आदि होते हैं। इस प्रकार व्यक्ति का समाजिक विकास जीवन पर्यन्त चलता ही रहता है।

समाजिकरण का निष्कर्ष

समाजीकरण एक ऐसी सामाजिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति में सामाजिक गुणों का विकास होता है और वह सामाजिक प्राणी बनता है। इस प्रक्रिया के द्वारा व्यक्ति समाज और संस्कृति के बीच रहकर विभिन्न साधनों के माध्यम से सामाजिक गुणों को अनुकरण करके सीखता है। अतः इसे सीखने की प्रक्रिया भी कहा जा सकता है।

 

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